गुजरात और राजस्थान में खरीफ मूंगफली मानसून की पहली अच्छी बारिश के साथ, मध्य जून से शुरू जुलाई तक, अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी में बोई जाती है, और अक्टूबर से नवंबर में तब खोदी जाती है जब पत्तियां पीली पड़ें, पुरानी पत्तियां झड़ें और फली के छिलके के अंदर काली धारियां दिखें। ठीक-ठाक साल में प्रति एकड़ लगभग 6 से 10 क्विंटल सूखी फली (15 से 25 q/ha) की उम्मीद रखें, और भंडारण या बिक्री से पहले फली को लगभग 8% नमी तक सुखाएं।

2026-27 के लिए खोल सहित मूंगफली का MSP ₹7,517 प्रति क्विंटल है, जो पिछले साल के ₹7,263 से ₹254 ज़्यादा है। अभी कटाई का समय है, इसलिए यह गाइड सही समय पर खुदाई, सुखाई, aflatoxin से बचाव और बिक्री पर खास ज़ोर देती है।

मूंगफली कहां और कब बोई जाती है

  • राजस्थान: एक राज्य परियोजना रिपोर्ट में जून से जुलाई की बुवाई और अक्टूबर से नवंबर की कटाई बताई गई है; गुच्छेदार किस्मों में पौधे से पौधे 15 से 20 cm की दूरी पर 80 से 100 kg बीज प्रति हेक्टेयर और फैलने वाली किस्मों में 60 से 80 kg, 5 cm से ज़्यादा गहरा नहीं बोना है। मुख्य ज़िले बीकानेर, जयपुर, जैसलमेर और नागौर बताए गए हैं।
  • खरीफ (बारानी या सुरक्षात्मक सिंचाई के साथ): जून से जुलाई में बुवाई और अक्टूबर से नवंबर में कटाई। बारानी फसल के लिए PAU की सलाह है कि मानसून के साथ, जून के आखिरी हफ्ते या जुलाई के पहले हफ्ते में, जितनी जल्दी हो सके बोएं, क्योंकि देर से बुवाई पर फली की पैदावार लगातार घटती जाती है। बारानी फसल के लिए जुलाई से सितंबर के बीच 50 cm अच्छी तरह बंटी हुई बारिश चाहिए।
  • सिंचित जल्दी खरीफ और गर्मी की फसल: पंजाब में PAU खरीफ फसल के लिए बुवाई से पहले सिंचाई के साथ अप्रैल के अंत से मई के अंत तक बुवाई की सिफारिश करता है। गुजरात में GJG 31 जैसी किस्में खास तौर पर गर्मी की फसल के लिए जारी की गई हैं। राजस्थान और गुजरात के नहर और स्प्रिंकलर वाले इलाके यही सिंचित विकल्प अपनाते हैं; अपने ज़ोन की तारीख अपने राज्य के विश्वविद्यालय से पूछें।

किस्में

जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय (JAU) ने गुजरात के लिए कई किस्में जारी की हैं। नीचे की पैदावार रिलीज़ परीक्षणों की फली की पैदावार है, जो खेत के औसत से ज़्यादा है, इसलिए इसे क्रम समझें, वादा नहीं। आखिरी पंक्ति की राजस्थान की किस्में राज्य की कृषि प्रतिस्पर्धात्मकता परियोजना की रिपोर्ट से हैं और पुरानी रिलीज़ हैं; मौजूदा सूची के लिए SKRAU बीकानेर या अपने KVK से पूछें, क्योंकि गुजरात के लिए तैयार किस्में राजस्थान की बलुई मिट्टी में न जमें।

किस्मकिसके लिए सिफारिशपरीक्षण में फली की पैदावारखूबियां (JAU)
GJG 9खरीफ बारानी, पूरा गुजरात1,632 kg/ha (लगभग 6.6 q/एकड़)तना सड़न, जैसिड और थ्रिप्स के प्रति सहनशील
GJG 22खरीफ अर्ध-फैलने वाले इलाके, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात1,770 kg/ha (लगभग 7.2 q/एकड़)दाना निकलने की दर 72.5%; कॉलर सड़न के प्रति प्रतिरोधी
GJG 17खरीफ बारानी फैलने वाली किस्मों के इलाके1,798 kg/ha (लगभग 7.3 q/एकड़)दाना निकलने की दर 66.2%; तना सड़न के प्रति सहनशील
GJG HPS 1खरीफ बारानी, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात2,125 kg/ha (लगभग 8.6 q/एकड़)मोटे दाने वाली
GJG 32खरीफ अर्ध-फैलने वाले इलाके, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरातपरीक्षणों में औसत 3,392 kg/ha (लगभग 13.7 q/एकड़)Spanish गुच्छेदार; तेल 53.9%; तुलना की किस्मों से ज़्यादा टिक्का और रतुआ प्रतिरोधी
GJG 31गर्मी की फसल, पूरा गुजरात3,483 kg/ha (लगभग 14.1 q/एकड़)परीक्षणों में कली गलन (bud necrosis) से मुक्त; सिर्फ सिंचित गर्मी की फसल के लिए
RS 1 (राजस्थान)राजस्थान की बलुई मिट्टी, खरीफ15 से 20 q/ha (लगभग 6 से 8 q/एकड़)फैलने वाली किस्म, 135 से 140 दिन, 77% दाना निकलना, टिक्का के प्रति सहनशील
RSB 103-87 (राजस्थान)भारी मिट्टी, जैसे कोटा इलाका18 से 20 q/ha (लगभग 7 से 8 q/एकड़)अर्ध-फैलने वाली, 66% दाना निकलना, तेल 50%
RGC 936, RGC 1055, HG 234, HG 563, HG 365बीकानेर इलाके के परियोजना क्लस्टरों में उगाई जाती हैंनहीं बताई गईरिपोर्ट के क्लस्टरों में मुख्य किस्मों के रूप में नाम दिए गए

बढ़वार का तरीका अपनी योजना से मिलाएं: गुच्छेदार किस्में जल्दी पकती हैं और खोदना आसान होता है, जबकि फैलने वाली किस्में बारानी सौराष्ट्र की मिट्टी के लिए ठीक हैं। प्रमाणित बीज खरीदें, क्योंकि घर में रखा बीज दम खो देता है और बीमारी साथ लाता है।

बीज, बीज दर और बुवाई

  • दाने: बुवाई से लगभग एक पखवाड़ा पहले स्वस्थ फलियों को हाथ से छीलें (पैडल शेलर हाथ से छीलने से 6 से 8 गुना काम करता है) और सिकुड़े या दागी दाने हटा दें।
  • बीज दर (PAU): गुच्छेदार किस्मों के लिए 30 x 15 cm पर प्रति एकड़ 32 kg दाने, SG 99 के लिए 30 x 15 cm पर 40 kg, और अर्ध-फैलने वाली किस्मों के लिए 30 x 22.5 cm पर प्रति एकड़ 38 से 48 kg। यह लगभग 80 से 120 kg प्रति हेक्टेयर है। अपनी किस्म के लिए बीज के लेबल पर दी गई दर इस्तेमाल करें।
  • गहराई और तरीका: सीड ड्रिल या प्लांटर से लगभग 5 cm गहरा। बुवाई के तुरंत बाद छोटी मेड़बंदी वाले प्लॉट बना लें ताकि सुरक्षात्मक सिंचाई दे सकें।
  • बीज उपचार: फफूंदनाशक (thiram 5 g या mancozeb 3 g प्रति kg दाने, PAU) बीज और अंकुर की सड़न रोकता है। imidacloprid वाला उपचार सफेद ग्रब और दीमक को भी रोकता है। तना सड़न के खिलाफ Trichoderma 4 g/kg इस्तेमाल होता है। लेबल की खुराक लें और बुवाई से ठीक पहले उपचार करें।

खाद और जिप्सम

मूंगफली अपनी नाइट्रोजन खुद बनाती है, इसलिए खुराक छोटी है। तालिका मध्यम उर्वरता वाली मिट्टी (पंजाब) के लिए PAU की सिफारिश है; गुजरात की चूनेदार और राजस्थान की बलुई मिट्टी अलग होती हैं, इसलिए मिट्टी की जांच (Soil Health Card) या JAU की सलाह लें।

खरीफ फसल, प्रति एकड़मात्राप्रति हेक्टेयर (लगभग)
नाइट्रोजन : P2O5 : K2O6 : 8 : 10 kg15 : 20 : 25 kg
खाद के रूप में13 kg यूरिया + 50 kg सिंगल सुपरफॉस्फेट + 17 kg म्यूरिएट ऑफ पोटाश (पोटाश तभी जब मिट्टी जांच में कमी दिखे)32 kg यूरिया + 124 kg SSP + 42 kg MOP
जिप्सम (फली भरने के लिए सल्फर और कैल्शियम)50 kg प्रति एकड़, बुवाई के समय बिखेरकरलगभग 124 kg
  • अगर पिछली फसल को पूरी फॉस्फोरस खुराक मिली थी, तो PAU के अनुसार खरीफ मूंगफली में फॉस्फोरस छोड़ा जा सकता है।
  • ज़िंक की कमी (ऊपर की छोटी, हल्की पीली पत्तियां, बौने पौधे, सिकुड़े दाने) के लिए PAU प्रति एकड़ 25 kg ज़िंक सल्फेट (21%) की सलाह देता है, जो 2 से 3 साल के लिए काफी है।
  • फसल चक्र अपनाएं; PAU चेतावनी देता है कि साल-दर-साल एक ही खेत में मूंगफली न उगाएं क्योंकि मिट्टी की बीमारियां बढ़ती हैं। उत्पादों की जानकारी के लिए खाद देखें।

खरपतवार और पानी

बुवाई के लगभग 3 हफ्ते बाद और फिर 3 हफ्ते बाद, दो बार गुड़ाई करें। फूल आने और सुई (peg) बनने तक फसल को खरपतवार-मुक्त रखें, और सुइयां मिट्टी में घुस जाने के बाद गहरी खुदाई से बचें। बारानी फसल को बारिश न हो तो फूल आने पर एक सिंचाई, फली बनते समय एक या दो और, और कटाई से कुछ दिन पहले एक और चाहिए ताकि मिट्टी ढीली हो जाए और फलियां पौधे के साथ निकल आएं (PAU)। जहां नहर या बोरवेल का पानी हो, वहां स्प्रिंकलर सिंचाई पानी बचाती है; स्प्रिंकलर सिंचाई और सब्सिडी के विकल्प देखें।

मुख्य बीमारियां और कीट

समस्यालक्षणव्यावहारिक नियंत्रण
टिक्का पत्ती धब्बापत्तियों पर पीले घेरे वाले भूरे गोल धब्बे, पत्तियों का जल्दी गिरनाफफूंदनाशक से बीज उपचार; पहले धब्बे दिखते ही लेबल से मंज़ूर फफूंदनाशक जैसे mancozeb या chlorothalonil छिड़कें, लेबल जितना कहे उतनी बार दोहराएं
तना सड़न और कॉलर सड़नतने के आधार पर सफेद रुई जैसी बढ़त, मुरझानाफसल चक्र, अवशेष हटाकर जलाना, Trichoderma से बीज और मिट्टी का उपचार; सहनशील किस्में चुनें जैसे GJG 9, GJG 17 (तना सड़न) और GJG 22 (कॉलर सड़न)
सफेद ग्रब और दीमकमुरझाते पौधे जिनकी जड़ें कटी हों, खराब फलियांसफेद ग्रब पर असरदार कीटनाशक से बीज उपचार; गर्मी में गहरी जुताई
माहू, जैसिड, थ्रिप्समुड़ी पत्तियां, काली फफूंद; थ्रिप्स कली गलन फैलाते हैंबारिश कम होने पर सबसे ज़्यादा; जल्दी निगरानी करें और सिर्फ लेबल से मंज़ूर दवाएं इस्तेमाल करें

दवाओं और खुराक की पुष्टि अपने KVK से करें, क्योंकि मंज़ूरियां बदलती रहती हैं। कीट पेज भी देखें।

कटाई: समय और क्योरिंग

  • पकने के संकेत (PAU): पुरानी पत्तियों का एक-सा पीला पड़ना और झड़ना, फली के छिलके के अंदर की तरफ भूरी से काली धारियां, और दानों का गुलाबी होना। पंजाब में बारानी फसल आम तौर पर नवंबर की शुरुआत में तैयार होती है; गुजरात और राजस्थान में अपना खेत खुद देखें, क्योंकि जून से जुलाई की शुरुआत की बुवाई आम तौर पर अक्टूबर से नवंबर की शुरुआत में तैयार होती है।
  • खुदाई: तब खोदें जब मिट्टी में इतनी नमी हो कि फलियां निकल आएं; फसल को ज़्यादा पकने न दें वरना फलियां मिट्टी में रह जाएंगी। बड़े खेतों में मशीन से खुदाई और झटकने वाले यंत्र इस्तेमाल होते हैं।
  • क्योरिंग: खुदी फसल को छोटे ढेरों या उलटी कतारों में, फलियां ऊपर रखकर, लगभग दो दिन छोड़ें, फिर फलियां झाड़ें या तोड़ें और फटकें।

सुखाई, aflatoxin और भंडारण

  • भंडारण से पहले फलियों को 4 से 5 दिन धूप में सुखाएं (PAU)। ICRISAT की सलाह है कि फलियां नंगी ज़मीन पर नहीं, तिरपाल या चटाई पर सुखाएं और बीज की नमी लगभग 8% तक लाएं; उसके प्रमाणित बीज मानक में नमी की सीमा 9% है।
  • भंडारण से पहले खराब, सिकुड़ी, सड़ी या फटी फलियां हटा दें, साफ फलियों को बीनी हुई बची फलियों में न मिलाएं, और सूखी, हवादार जगह पर रखें जो फर्श या दीवारों से नमी न खींचे।
  • उलटी कतारों में सुखाने से aflatoxin संदूषण घटता पाया गया है। सूखती फलियों पर देर की बारिश मुख्य खतरा है, इसलिए ढेर ढकने के लिए तिरपाल तैयार रखें।
💡 सुझाव: ICRISAT की सूखेपन की आसान जांच: एक साफ, सूखी प्लास्टिक की बोतल में मुट्ठी भर छिली मूंगफली और एक चम्मच सूखा नमक डालें, ढक्कन बंद करके 30 मिनट धूप में रखें। अगर बोतल के अंदर नमी दिखे तो मूंगफली को और सुखाना होगा।

बिक्री: MSP, सरकारी खरीद और मंडी

  • MSP 2026-27: ₹7,517 प्रति क्विंटल। सरकार का अनुमानित अखिल भारतीय उत्पादन लागत ₹5,011 प्रति क्विंटल है, इसलिए MSP ₹2,506 (50%) का मार्जिन देता है।
  • सरकारी खरीद: Price Support Scheme के तहत खरीद के लिए राज्यवार मंज़ूरी और पहले से पंजीकरण ज़रूरी है। पिछले साल गुजरात ने 1 से 15 सितंबर तक e-Samruddhi पोर्टल पर गांव के e-Gram केंद्रों से किसानों का पंजीकरण मुफ्त किया। इस साल की तारीखें राज्य का कृषि विभाग घोषित करेगा, इसलिए इंतज़ार करने के बजाय अपने गांव के केंद्र या सहकारी समिति से पूछते रहें।
  • मंडी: कटाई के समय भाव अक्सर गिरते हैं। मूंगफली मंडी पेज के भाव की MSP से तुलना करें, और अगर आपकी मंडी जुड़ी है तो eNAM देखें। सूखी, साफ, एक-सी फलियां जिनमें कचरा कम हो सबसे अच्छा भाव पाती हैं और अगर आप रुकने का फैसला करें तो रखना भी आसान होता है।

लागत और कमाई का हिसाब

फली की पैदावार (q/एकड़)₹7,517 पर कुल आमदनी (₹)₹5,011/क्विंटल पर लागत (₹)मार्जिन (₹/एकड़)
645,10230,06615,036
860,13640,08820,048
1075,17050,11025,060

हिसाब: कुल आमदनी यानी पैदावार गुणा ₹7,517; लागत यानी पैदावार गुणा ₹5,011 (यह राष्ट्रीय औसत है जिसमें किराये की और घर की मज़दूरी, आदान, किराया और ब्याज शामिल हैं); मार्जिन दोनों का अंतर है। पैदावार की पंक्तियां मान्यताएं हैं; बारानी की औसत पैदावार अक्सर कम होती है, जिससे प्रति क्विंटल आपकी लागत बढ़ती है। MSP की जगह ₹6,500 पर बेचने से प्रति क्विंटल मार्जिन ₹2,506 से घटकर ₹1,489 रह जाता है। फसल को PMFBY से सुरक्षित करें और किसान क्रेडिट कार्ड से उसकी वित्त व्यवस्था करें।

स्रोत