उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार और उत्तराखंड में लहसुन अक्टूबर से नवंबर में लगाएं, और मध्य प्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र में सितंबर से नवंबर में (ICAR-DOGR)। बड़ी, स्वस्थ कलियां (हर कली 1.5 g से ज़्यादा) लें, 400 से 500 kg प्रति हेक्टेयर (160 से 200 kg प्रति एकड़), कतारों के बीच 15 cm और पौधों के बीच 10 cm की दूरी पर लगाएं, और कटाई मार्च से अप्रैल में होगी।

भाव के बारे में सच्चाई समझें। शीर्षक में "₹10,000+ प्रति क्विंटल" का वादा है, और लहसुन वहां तक पहुंचता है, पर हर मंडी में या हर मौसम में नहीं। 25 सितंबर 2026 को Agmarknet पर आधारित एग्रीगेटर आंकड़ों में राज्यवार मॉडल भाव प्रति क्विंटल लगभग उत्तर प्रदेश में ₹6,100, मध्य प्रदेश और राजस्थान में ₹7,000, हरियाणा में ₹7,500 और महाराष्ट्र में ₹9,300 रहे, जबकि तमिलनाडु की किसान मंडियों (उझावर संधई) में भाव इससे कहीं ऊंचा, लगभग ₹21,600 था। अखिल भारतीय मॉडल भाव लगभग ₹11,000 दिखता है, तो उसमें कुछ हिस्सा इन दक्षिणी मंडियों का है। लहसुन का भाव भरमार से कमी के बीच तेज़ी से झूलता है, इसलिए रकबा भंडारण, ग्रेड और अपनी लागत के हिसाब से तय करें, किसी एक भाव के भरोसे नहीं।

किस्म का चुनाव

ICAR-DOGR (प्याज और लहसुन अनुसंधान निदेशालय, पुणे) मैदानी इलाकों के लिए ये किस्में बताता है। पकने का समय बुवाई से दिनों में है; पैदावार अनुसंधान केंद्र के आंकड़े हैं, खेत में पैदावार अक्सर कम निकलती है।

किस्मकहांपकने का समयपैदावार (t/ha)टिप्पणी
Yamuna Safed (G-1)पूरे भारत में120 से 13015 से 17सफेद; आम तौर पर सबसे अच्छा विकल्प; पुरानी सफेद किस्मों से बेहतर तरीके से बैंगनी धब्बा, स्टेमफिलियम और थ्रिप्स सह लेती है (NHRDF)
Yamuna Safed-2 (G-50)उत्तर भारत120 से 13015 से 20सफेद; उत्तर भारत के लिए सिफारिश
Yamuna Safed-3 (G-282) और Agrifound ParvatiG-282 उत्तर और मध्य भारत के लिए; Parvati पहाड़ों के लिएDOGR ने नहीं बतायालगभग 17.5 से 20 (NHRDF के पुराने आंकड़े)बड़ी कलियां और बड़े गांठ, निर्यात ग्रेड के लिए ठीक (DOGR); G-282 मध्यम भंडारण वाली है, जबकि G-1 और G-50 बेहतर टिकती हैं (NHRDF)
Agrifound White (G-41)मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र130 से 13512 से 14जहां बैंगनी धब्बा और स्टेमफिलियम आम हैं वहां इनसे बीमार पड़ने का खतरा
Bhima Omkar (DOGR)दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान120 से 1358 से 14मध्यम आकार के, ठोस सफेद गांठ
Bhima Purple (DOGR)AP, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, UP120 से 1356 से 7बैंगनी छिलके वाले गांठ
VL Garlic 1 (VPKAS)बिहार, HP, J&K, उत्तराखंड, UP के पहाड़180 से 190पहाड़ों में 14 से 15 (मैदान में 9 से 10)लंबे दिन वाली किस्म, पहाड़ों के लिए

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय शरदकालीन गन्ने (सितंबर के आखिरी हफ्ते से अक्टूबर के पहले हफ्ते तक बोए गए) में सहफसल के तौर पर लहसुन के लिए PG 17 और PG 18 की सिफारिश करता है। अपने KVK से पूछ लें कि आपकी स्थानीय मंडी और खरीदार कौन सी किस्म पसंद करते हैं: निर्यात और बड़ी कली वाले बाज़ार गांठ के आकार का दाम देते हैं, जबकि स्थानीय खुदरा बाज़ार तीखेपन और टिकाऊपन का।

जलवायु, मिट्टी और खेत की तैयारी

  • जलवायु: लहसुन को बढ़ते समय ठंडा और नम मौसम चाहिए और गांठ पकते समय गर्म, सूखा मौसम। जो पौधे एक से दो महीने तक लगभग 20°C या उससे कम तापमान में रहते हैं उनमें गांठ जल्दी बनती है; जिन पौधों को यह ठंडा दौर नहीं मिलता, उनमें छोटी गांठ बन सकती है या बनती ही नहीं।
  • मिट्टी: उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी, pH 6 से 8। यह अम्लीय, क्षारीय और खारी मिट्टी और जलभराव के प्रति संवेदनशील है; मिट्टी की लवणता (ECe) लगभग 3.9 dS/m से ऊपर जाने पर पैदावार गिरने लगती है। भारी मिट्टी में बेढंगी गांठ बनती हैं।
  • तैयारी: मोल्डबोर्ड हल से जुताई करें, फिर कल्टीवेटर से तीन से चार बार जुताई करके ढेले और अवशेष हटाएं। आखिरी जुताई में जैविक खाद मिलाएं (15 t/ha गोबर की खाद FYM, या 7.5 t मुर्गी की खाद या वर्मीकम्पोस्ट, जिससे 75 kg N मिलता है) और 1.5 से 2 m चौड़ी और 4 से 6 m लंबी समतल क्यारियां बनाएं (DOGR)।

बुवाई: कली का चुनाव, उपचार, दूरी

  • गांठ को बुवाई से ठीक पहले ही तोड़ें, बाहरी छिलका मरोड़कर हटाएं और हर कली का आधार (बेस प्लेट) साबुत रखें; बिना बेस प्लेट की कली नहीं उगेगी। 1.5 g से भारी कलियां चुनें और छोटी, रोगी और टूटी कलियां छांट दें।
  • उपचार: बुवाई से ठीक पहले कलियों को carbendazim 0.1% के घोल में डुबोएं, ताकि जमाव के समय फफूंद रोग कम हों। जैव उर्वरक: DOGR Azospirillum और फॉस्फोरस घोलने वाले बैक्टीरिया 5 kg प्रति हेक्टेयर हर एक की सिफारिश करता है, जिन्हें 100 से 200 kg नम FYM में मिलाकर रात भर रखें।
  • बीज दर और दूरी: 400 से 500 kg कलियां प्रति हेक्टेयर, सीधी खड़ी मिट्टी की सतह से लगभग 2 cm नीचे, पौधे से पौधे 10 cm और कतार से कतार 15 cm की दूरी पर। कलियां 7 से 8 दिन में अंकुरित होती हैं, पर खरपतवार 3 से 4 दिन में निकल आते हैं।
  • समय: उत्तर के मैदानों में अक्टूबर से नवंबर में बुवाई करें। NHRDF जल्दी बुवाई को खेत में गांठ के समय से पहले अंकुरण का एक कारण बताता है, इसलिए तब बोएं जब शाम ठंडी होने लगे।
प्रति एकड़ बीज की लागत160 kg200 kg
अगर कलियां ₹80/kg की हों (सिर्फ उदाहरण)₹12,800₹16,000
अगर कलियां ₹120/kg की हों (सिर्फ उदाहरण)₹19,200₹24,000

लहसुन में बीज लागत का बड़ा हिस्सा होता है और बीज कलियों का भाव साल-दर-साल बहुत बदलता है, इसलिए रकबा तय करने से पहले पक्का भाव पूछ लें। बीज भरोसेमंद जगह से ही लें: वायरस वाले पौधों की गांठ छोटी रहती हैं और उनमें कलियां कम बनती हैं।

प्रति हेक्टेयर और प्रति एकड़ खाद

क्षेत्र (DOGR / AINRP-OG)NPKS प्रति हेक्टेयरNPKS प्रति एकड़जैविक खाद
हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश100:50:50:5040:20:20:2020 t FYM प्रति ha (लगभग 8 t प्रति एकड़)
बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, MP, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु (ऊटी)75:40:40:4030:16:16:1675 kg N के बराबर जैविक खाद, जैसे 15 t FYM प्रति ha (लगभग 6 t प्रति एकड़)

एक-तिहाई नाइट्रोजन और पूरा फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर बुवाई के समय डालें, और बाकी नाइट्रोजन दो बराबर हिस्सों में बुवाई के 30 और 45 दिन बाद दें। अगर मिट्टी जांच में जिंक की कमी निकले तो DOGR 10 kg ज़िंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की सलाह देता है; बोरॉन की कमी हो तो 10 kg बोरेक्स प्रति हेक्टेयर। आपके खेत को क्या चाहिए यह जानने के लिए Soil Health Card से जांच करवाएं, और खाद भी देखें। फसल के आखिरी दौर में ज़्यादा नाइट्रोजन से अंकुरण और गांठ फटने की समस्या होती है; 45 दिन के बाद और खाद न डालें।

सिंचाई और खरपतवार

  • बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई करें और फिर मिट्टी की नमी के हिसाब से हर 7 से 10 दिन पर। रबी की फसल को आम तौर पर 12 से 13 सिंचाई मिलती हैं। गांठ बनना शुरू होने और गांठ बढ़ने के समय नमी की कमी सबसे ज़्यादा नुकसान करती है।
  • कटाई से 10 से 15 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें, जब ऊपर का हिस्सा झुकने या सूखने लगे। पक रही फसल में सिंचाई से द्वितीयक जड़ें और अंकुर निकल आते हैं, और गांठ भंडारण में नहीं टिकतीं। सूखे दौर के बाद सिंचाई करने से बाहरी परतें फट जाती हैं। जलभराव से बचें, उससे आधार सड़न और बैंगनी धब्बा आता है।
  • चौड़ी मेड़-नाली पर (ऊपर 120 cm, नाली 45 cm, दो लेटरल) ड्रिप सिंचाई से DOGR के परीक्षणों में बाढ़ वाली सिंचाई के मुकाबले गांठ की पैदावार 15 से 25% बढ़ी; ड्रिप सिंचाई देखें।
  • खरपतवार: लहसुन खरपतवार से मुकाबला कम कर पाता है। DOGR बुवाई से पहले या बुवाई के समय oxyfluorfen 23.5% EC 1.5 से 2 ml प्रति लीटर या pendimethalin 30% EC 3.5 से 4 ml प्रति लीटर पानी की सिफारिश करता है, फिर 40 से 60 दिन पर एक बार हाथ से निराई। प्रति एकड़ मात्रा के लिए लेबल देखें।

थ्रिप्स, बैंगनी धब्बा और सफेद सड़न

समस्याकैसी दिखती हैप्रबंधन (DOGR)
थ्रिप्सपहले 45 दिनों में चांदी जैसे सफेद धब्बे, मुड़ी और ऐंठी पत्तियांफसल के चारों ओर बुवाई से 30 दिन पहले मक्का की दो कतारें (या एक मक्का और एक गेहूं की) बाड़ की तरह लगाएं; छिड़काव तभी करें जब गिनती लगभग 30 थ्रिप्स प्रति पौधा पार करे, लहसुन के लिए पंजीकृत दवा से (DOGR profenofos 0.1%, carbosulfan 0.2% या fipronil 0.1% बताता है) और स्प्रेडर के साथ
बैंगनी धब्बा और स्टेमफिलियम झुलसाछोटे सफेदी लिए धंसे धब्बे जिनके बीच में बैंगनी रंग; पत्तियां गिर जाती हैंMancozeb 0.25%, या tricyclazole, hexaconazole या propiconazole 0.1%, बुवाई के 30 दिन बाद से या रोग दिखते ही हर 10 से 15 दिन पर
सफेद सड़नपत्तियों के सिरे पीले होकर सूखना, जड़ें नष्ट, परतों पर सफेद रुई जैसी बढ़तफसल चक्र अपनाएं, रोगी पौधे नष्ट करें, मिट्टी का सौरीकरण करें; carbendazim 0.1% डाला जा सकता है
वायरस (OYDV, LYSV, IYSV)पीली धारियां, मोज़ेक, बौनापन; छोटी गांठवायरस-मुक्त बीज लें; माहू और थ्रिप्स पर नियंत्रण रखें, क्योंकि यही वायरस फैलाते हैं

पंजीकरण और प्रतिबंध बदलते रहते हैं, इसलिए छिड़काव से पहले दवा, मात्रा और प्रतीक्षा अवधि लेबल पर या अपने KVK से पक्की कर लें।

कटाई, क्योरिंग और भंडारण: यहीं भाव बनता है

  • जब ऊपर का हिस्सा पीला-भूरा होकर झुक जाए तब कटाई करें (उत्तर में मार्च से अप्रैल)। पौधों की कतार बनाकर ऊपर की पत्तियों से गांठों को ढक दें ताकि धूप से न झुलसें, और खेत में लगभग एक हफ्ता सूखने दें। फिर छाया में 7 से 10 दिन क्योर करें; गर्दन 2.5 cm छोड़ें और जड़ें काट दें।
  • सही तरीके से रखा लहसुन हवादार भंडार में सामान्य तापमान पर, जहां आर्द्रता 70% से कम हो, 5 से 6 महीने टिकता है। DOGR पहले ग्रेडिंग करने और 20 से 25 पौधों को उनके ऊपरी हिस्से के साथ गट्ठों में बांधने, छाया में लगभग 15 दिन खड़ा क्योर करने और फिर सूखी, हवादार जगह पर लटकाने की सलाह देता है।
  • खराब रखरखाव से 15 से 50% फसल बर्बाद हो सकती है; NHRDF के एक अध्ययन में सामान्य तापमान पर भंडारण नुकसान 42.4% रहा, जबकि 1 से 5°C और 75% आर्द्रता पर 12.5%। लहसुन को बहुत देर तक लगभग 4°C पर रखा जाए तो वह जल्दी अंकुरित हो सकता है, इसलिए सलाह लिए बिना बीज या गांठ को कोल्ड चेन में न रखें।
💡 सुझाव: लहसुन का भाव किससे बढ़ता है: ऐसी किस्म की बड़ी, एक-सी, अच्छी क्योर की हुई गांठ जो आपका खरीदार चाहता है, और सूखी हालत में पहुंचाई गई। आकार के हिसाब से ग्रेडिंग करें, फटी, टूटी और नरम गांठ अलग करें, और कमी के महीनों में बेचें जब भंडार कम हों। लहसुन के लाइव मंडी भाव से तुलना करें और प्रतिस्पर्धी बोली के लिए eNAM पर बेचने पर विचार करें।

एक एकड़ से कितनी कमाई हो सकती है, हिसाब के साथ

एक एकड़ 0.4047 हेक्टेयर होता है। ऊपर की सूचियों में DOGR/NHRDF की पैदावार सीमा (8 से 15 टन प्रति हेक्टेयर, यानी 32 से 61 क्विंटल प्रति एकड़) और सितंबर 2026 की भाव सीमा लेकर:

प्रति एकड़ पैदावार₹6,000/q पर₹8,000/q पर₹10,000/q पर
30 क्विंटल₹1,80,000₹2,40,000₹3,00,000
40 क्विंटल₹2,40,000₹3,20,000₹4,00,000
50 क्विंटल₹3,00,000₹4,00,000₹5,00,000

ये कुल (सकल) आंकड़े हैं। इनमें से बीज (ऊपर की तालिका देखें), बुवाई, निराई और कटाई की मज़दूरी, खाद, सिंचाई, छिड़काव और भंडारण का नुकसान घटाएं, फिर लागत-बराबरी का नियम लगाएं: लागत-बराबरी भाव = प्रति एकड़ कुल लागत ÷ बिकने लायक क्विंटल। क्योंकि लहसुन की फसल का काफी हिस्सा भंडारण में खराब हो सकता है, इसलिए सिर्फ वही क्विंटल गिनें जो आप सच में बेचेंगे। PMFBY के तहत रबी बीमा लहसुन को तभी कवर करता है जहां वह अधिसूचित हो, इसलिए अपना ज़िला जांच लें, और किसान क्रेडिट कार्ड साहूकारी कर्ज़ के मुकाबले आदान (इनपुट) के लिए सस्ता कर्ज़ है।

स्रोत