जैविक तरीके से गेहूं की खेती कैसे करें

जानें जैविक तरीकों से गेहूं की खेती कैसे की जाती है, बिना रासायनिक खाद या कीटनाशकों के इस्तेमाल के। इससे न केवल फसल सुरक्षित होती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है।

जैविक तरीके से गेहूं की खेती कैसे करें

परिचय

भारत में गेहूं एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग ने मिट्टी को नुकसान पहुँचाया है। अब किसान जैविक खेती की ओर रुख कर रहे हैं क्योंकि इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन लंबे समय तक स्थिर रहता है।

जैविक गेहूं की खेती के मुख्य चरण

1. भूमि की तैयारी

  • खेत की गहरी जुताई करें ताकि पुराने कीट और खरपतवार नष्ट हो जाएं।
  • गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मी कम्पोस्ट 10-15 टन प्रति एकड़ डालें।
  • भूमि में नमी बनाए रखें ताकि जैविक खाद सक्रिय रूप से काम कर सके।

2. बीज का चयन और उपचार

  • देशी और रोग-प्रतिरोधक किस्मों को प्राथमिकता दें जैसे: K-9107, HD-2967
  • बीज उपचार के लिए गौमूत्र या त्रिकोण जीवामृत का प्रयोग करें।

3. बुवाई का सही समय

उत्तर भारत में गेहूं की बुवाई का समय नवंबर का पहला और दूसरा सप्ताह आदर्श होता है। समय पर बुवाई से बेहतर अंकुरण और पैदावार होती है।

4. सिंचाई व्यवस्था

  • पहली सिंचाई: बुवाई के 20-25 दिन बाद (कल्ले निकलने पर)
  • दूसरी सिंचाई: बूट आने पर
  • तीसरी: फूल निकलने पर
  • अंतिम सिंचाई: दाना भरने की अवस्था पर
  • ड्रिप सिंचाई अपनाने से पानी की बचत होती है और फसल में रोग नहीं फैलते।

5. जैविक खाद व पोषण प्रबंधन

  • हर महीने गोमूत्र आधारित जीवामृत का छिड़काव करें।
  • नीम खली, पंचगव्य और मटका खाद का प्रयोग करें।
  • नाइट्रोजन के लिए धैनचा या मूँग की फसल को रोटेशन में उगाएं।

6. कीट व रोग प्रबंधन

  • नीम तेल (5%) का छिड़काव कीट नियंत्रण में उपयोगी है।
  • गौमूत्र और लहसुन-नीम कीटनाशक का प्रयोग करें।
  • फफूंदी से बचने के लिए ट्राइकोडर्मा जैव-फंगीसाइड का प्रयोग करें।

7. कटाई और भंडारण

  • जब पौधों की 80% बालियां पीली हो जाएं, तब कटाई करें।
  • अनाज को अच्छी तरह सुखाकर ही भंडारण करें।
  • भंडारण के लिए नीम की पत्तियों या भिंडी के सूखे डंठलों का उपयोग करें।

फायदे

  • जमीन की उर्वरकता लंबे समय तक बनी रहती है।
  • उत्पाद रसायन-मुक्त होने के कारण बाज़ार में ऊँचे दाम मिलते हैं।
  • पर्यावरण और किसान दोनों के स्वास्थ्य में सुधार।

निष्कर्ष

जैविक तरीके से गेहूं की खेती करना कोई कठिन कार्य नहीं है यदि सही जानकारी और समर्पण हो। इस प्राकृतिक विधि से न सिर्फ अच्छी पैदावार होती है, बल्कि फसल भी सुरक्षित होती है।

कॉल टू एक्शन

प्रिय किसान भाइयों, आज ही जैविक गेहूं की खेती शुरू करें और अपने खेत, परिवार और उपभोक्ताओं को रासायन मुक्त पोषण दें। यदि आपको जैविक खाद या बीजों की जानकारी चाहिए, तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से संपर्क करें या अपने क्षेत्र के सफल जैविक किसानों से अनुभवी सलाह लें।

Previous Article

Natural Farming vs Organic Farming: What’s Better?

Next Article

How to Prepare Organic Compost at Home Easily

Write a Comment

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *