यह किसान कैसे बिना रसायन के पैदावार बढ़ा पाया
परिचय
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अधिक प्रयोग से जहां एक ओर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है, वहीं दूसरी ओर उत्पादन की लागत भी बढ़ती जा रही है। परंतु राजस्थान के भरतपुर जिले के किसान रामनारायण मीणा ने प्राकृतिक खेती अपनाकर बिना रसायन के फसल की पैदावार बढ़ा दी।
रामनारायण जी की खेती पद्धति
1. देशी गाय पर आधारित कृषि
रामनारायण जी प्राकृतिक खेती के लिए देशी गाय के गोबर और गोमूत्र का उपयोग करते हैं। उन्होंने ‘जीवामृत’ और ‘घनजीवामृत’ का इस्तेमाल शुरू किया:
- जीवामृत: गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और पानी मिलाकर तैयार किया गया घोल।
- घनजीवामृत: सूखा हुआ और ठोस संस्करण, जो मिट्टी में मिलाने के लिए उपयुक्त है।
2. मल्चिंग का उपयोग
रामनारायण जी फसल के अवशेषों से मल्च तैयार करते हैं और इसे खेतों में बिछाते हैं। इससे:
- नमी संरक्षित रहती है
- घास-पात नहीं उगते
- मिट्टी की उत्पादकता बनी रहती है
3. फसल चक्र और मिश्रित खेती
उन्होंने फसल चक्र अपनाया, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। वे दलहनी, तिलहनी और अनाज की मिश्रित खेती करते हैं:
- मसूर और गेहूं साथ में
- चना और सरसों की मिश्रित बुवाई
परिणाम
पहले जहां उन्हें गेहूं में प्रति बीघा 10-12 क्विंटल उपज मिल रही थी, वहीं अब बिना रसायन के 14-15 क्विंटल तक उत्पादन हो रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात, मिट्टी की सेहत सुधरी है और उत्पादन लागत भी घटी है।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
रामनारायण जी ने दिखा दिया कि बिना रसायन के भी ऊंची पैदावार संभव है — बस सही तकनीक अपनानी होती है।
आप भी प्राकृतिक खेती अपनाइए
अगर आप भी अपनी खेती में लागत कम करके पैदावार बढ़ाना चाहते हैं, तो आज ही प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या अनुभवी किसानों से संपर्क करें और देशी तरीके अपनाएं।
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