सफल जैविक किसान से खास बातचीत
परिचय: किसान रमेश यादव की प्रेरणादायक कहानी
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के गाँव हरिहरपुर से ताल्लुक रखने वाले रमेश यादव पिछले 10 वर्षों से जैविक खेती कर रहे हैं। वे परंपरागत रासायनिक खेती से हटकर सफलतापूर्वक पूरी तरह प्राकृतिक खेती पर निर्भर हैं। उनकी यह यात्रा अब कई किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
जैविक खेती की शुरुआत कैसे हुई?
रमेश जी बताते हैं, “शुरुआत में मुझे जैविक खेती के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। लेकिन जब मैंने खेत की मिट्टी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर असर देखा, तब मैंने जैविक खेती को अपनाने का निश्चय किया। शुरुआत मुश्किल थी, लेकिन परिणामों ने मेहनत वसूल कर दी।”
किन संसाधनों और तकनीकों का प्रयोग करते हैं?
रमेश यादव निम्नलिखित जैविक तकनीकों का प्रयोग करते हैं:
- जैविक खाद जैसे गोबर खाद, कंपोस्ट, पंचगव्य
- बीज उपचार के लिए नीम और हल्दी का प्रयोग
- मल्चिंग और फसल चक्र का पालन
- देशी गाय से संरक्षित जीवामृत का छिड़काव
सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या रहीं?
“शुरुआत में फसल की पैदावार थोड़ी कम हुई और परिवार वालों का भी विरोध झेलना पड़ा। स्थानीय बाजार में जैविक उत्पादों की पहचान भी एक चुनौती थी। लेकिन जैसे-जैसे ग्राहक और दुकानदार जागरूक हुए, बाजार बनता गया।” रमेश जी बताते हैं।
जैविक खेती के लाभ क्या हैं?
- मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
- स्वास्थ्यवर्धक और बेअसर रसायनों से मुक्त फसलें
- लंबे समय में लागत में कमी
- बाजार में जैविक उत्पाद की अधिक माँग और कीमत
अन्य किसानों के लिए सलाह
रमेश जी की सलाह है:
- छोटे स्तर से शुरू करें और अनुभव लें
- स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से मार्गदर्शन लें
- जैविक समूहों और मंडियों से जुड़ें
निष्कर्ष
रमेश यादव जैसे किसानों की कहानियाँ यह दिखाती हैं कि कठिन परिश्रम, जागरूकता और सही जानकारी के साथ कोई भी किसान जैविक खेती को अपनाकर बेहतर आमदनी और स्वस्थ समाज की ओर कदम बढ़ा सकता है।
कॉल टू एक्शन
अगर आप भी जैविक खेती शुरू करना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी कृषि अधिकारी या KVK से संपर्क करें। ऑनलाइन कोर्स और ट्रेनिंग कार्यक्रमों के लिए www.paramparagat.net पर जाएँ और खुद को पंजीकृत करें।