कश्मीर में केसर की खेती: एक लाभदायक व्यवसाय
परिचय
केसर, जिसे ‘लाल सोना’ भी कहा जाता है, विश्व की सबसे महंगी मसालों में से एक है। भारत में इसका प्रमुख उत्पादन केवल कश्मीर के कुछ क्षेत्रों में होता है, खासकर कि पाम्पोर, श्रीनगर और बड़गाम जिले में। सही जानकारी और तकनीकों के साथ, किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
केसर की खेती के लिए आवश्यक जलवायु और भूमि
- ठंडी और सूखी जलवायु आवश्यक है
- चरखी मिट्टी (Loamy Soil) उपयुक्त होती है
- भूमि की उचित जल निकासी जरूरी है
खेती की विधि
1. भूमि की तैयारी
जुलाई से अगस्त के बीच खेत की जुताई कर इसमें गोबर की खाद डालें। खेत की सतह समतल होनी चाहिए।
2. बीज (बल्ब) का चयन
- सड़ी-गली या रोगग्रस्त कंदों से बचें
- प्रति हेक्टेयर 200-250 किलोग्राम बल्ब आवश्यक होते हैं
3. बोआई का समय और तरीका
अगस्त से सितंबर के बीच बोआई करें। बल्बों को 10-15 सेमी की गहराई और 7-10 सेमी की दूरी पर रोपें।
4. सिंचाई और देखरेख
- बहुत अधिक सिंचाई से बचें
- खरपतवार नियंत्रण करें
- कीट और रोग नियंत्रण हेतु जैविक उपाय अपनाएं
फूल और हार्वेस्टिंग
अक्टूबर से नवंबर के बीच फूल खिलते हैं। हर सुबह फूलों की तुड़ाई करें ताकि ताजगी बनी रहे। तुड़ाई के बाद लाल धागों (stigma) को अलग कर अच्छी तरह सुखाएं।
लाभ और मूल्य
- 1 किलो शुद्ध केसर का बाजार मूल्य ₹2,50,000 से ज्यादा हो सकता है
- कम लागत में उच्च मुनाफा संभव
- सरकारी सब्सिडी और योजनाएं भी उपलब्ध
सरकारी सहयोग और प्रशिक्षण
केंद्र और राज्य सरकारें किसानों को मिनी मिशन ऑन सैफ्रन (NMS) जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रशिक्षण, सब्सिडी और तकनीकी सहायता उपलब्ध करवा रही हैं। कृपया अपने नजदीकी कृषि विभाग से संपर्क करें।
निष्कर्ष
केसर की खेती उन किसानों के लिए एक स्वर्णिम अवसर है जो कम जमीन में अधिक लाभ कमाना चाहते हैं। सही तकनीक, समय पर देखभाल और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आप भी इस कीमती मसाले की खेती से अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।
किसानों के लिए सुझाव
यदि आप भी केसर की खेती शुरू करना चाहते हैं, तो आज ही अपने नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क करें, प्रशिक्षण प्राप्त करें, और तकनीकी सहायता पाएं। अपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु की जांच कर उचित योजना बनाएं।
आगे बढ़ें और लाल सोने की खेती से अपनी खेती को एक नई दिशा दें!