राजस्थान में सरसों की उन्नत खेती कैसे करें
राजस्थान में सरसों की खेती का महत्व
राजस्थान भारत का प्रमुख सरसों उत्पादक राज्य है जहाँ यह फसल मुख्यतः रबी सीजन में नवंबर से फरवरी के बीच उगाई जाती है। इसकी खेती से किसानों को कम लागत में अच्छा मुनाफा मिल सकता है।
अनुकूल जलवायु और मिट्टी
- सरसों की खेती के लिए ठंडी और शुष्क जलवायु उचित होती है।
- बलुई दोमट और अच्छे जल निकास वाली मिट्टी बेहतर रहती है।
- pH मान 6 से 8 तक उपयुक्त होता है।
बीज चयन और बुवाई का समय
प्रसिद्ध किस्में:
- विजय गोल्ड
- आर.एच.-749
- विराट
- पीआर-15
बुवाई समय:
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के प्रथम सप्ताह तक बुवाई करें।
बीज मात्रा:
4 से 6 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है।
खाद एवं उर्वरक प्रबंधन
- गोबर की खाद: 15-20 टन प्रति हेक्टेयर मिट्टी तैयारी के समय डालें।
- यूरिया: 50-60 किग्रा प्रति हेक्टेयर
- DAP: 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर
- सल्फर: उचित मात्रा में देने से उपज में वृद्धि होती है।
सिंचाई व्यवस्था
- पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद करें।
- फूल व फलावस्था के समय सिंचाई ज़रूरी है।
- अधिक सिंचाई से बचें, नहीं तो फसल में रोग लग सकते हैं।
रोग और कीट नियंत्रण
आम रोग:
- श्वेत रतुआ (White rust)
- पत्ती झुलसा (Alternaria)
इनसे बचाव हेतु रोगमुक्त बीज लें और आवश्यकतानुसार फंफूदनाशकों का छिड़काव करें।
मुख्य कीट:
- झुला कीट (Mustard sawfly)
- तना मक्खी
समय पर कीटनाशकों जैसे डाइमेथोएट (30 ईसी) का छिड़काव करें।
फसल कटाई और उत्पादन
फसल पकने पर जब 70-80% फलियाँ पीली हो जाएं, तब सुबह के समय कटाई करें। एक हेक्टेयर में औसतन 15-20 क्विंटल उपज प्राप्त होती है।
बाजार व लाभ
सरसों के तेल, खली और बीज की खपत बहुत अधिक है, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी घोषित करती है।
निष्कर्ष और सलाह
सरसों की वैज्ञानिक व उन्नत विधियों से खेती कर राजस्थान के किसान कम लागत में उच्च उपज और अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
किसानों के लिए खास सुझाव
सरसों की खेती से संबंधित अधिक जानकारी और नए कृषि तकनीकों के लिए अपने नजदीकी कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें। सफलता की कुंजी है – सही समय पर निर्णय और आधुनिक तकनीक का प्रयोग।
आज ही सरसों की उन्नत खेती की शुरुआत करें और अपनी आमदनी बढ़ाएँ!