भारत कैसे कर रहा है क्लाइमेट-स्मार्ट फार्मिंग की ओर रुख
क्लाइमेट-स्मार्ट फार्मिंग क्या है?
क्लाइमेट-स्मार्ट फार्मिंग (जलवायु अनुकूल कृषि) वह कृषि तरीका है जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने, फसल उत्पादन बढ़ाने और पर्यावरण की रक्षा करने में सक्षम होता है। इसका उद्देश्य किसानों को सहनशील और टिकाऊ खेती के लिए सक्षम बनाना है।
भारत में क्लाइमेट-स्मार्ट खेती की आवश्यकता क्यों?
भारत में कृषि मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है। लेकिन बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और अत्यधिक मौसमीय घटनाओं के कारण किसान संकट में हैं। ऐसे में क्लाइमेट-स्मार्ट खेती एक आवश्यकता बन गई है।
भारत सरकार की पहलें
- राष्ट्रीय नवाचार कृषि योजना (NICRA) – जलवायु अनुरूप कृषि हेतु R&D को बढ़ावा देना।
- प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) – सौर पंपों का उपयोग बढ़ाकर ऊर्जा स्वतंत्रता प्राप्त करना।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना – मृदा की गुणवत्ता जाँचकर उर्वरकों का संतुलित उपयोग।
क्लाइमेट-स्मार्ट तकनीकें जो किसान अपना सकते हैं
- ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई: जल की बचत के साथ ज्यादा उत्पादकता।
- फसल चक्र अपनाना: मिट्टी उपजाऊ बने रखने में मदद।
- जैविक खाद और कीटनाशकों का उपयोग: पर्यावरण के लिए अनुकूल और लागत में कम।
- कम जल वाली फसलों की खेती: जैसे बाजरा, ज्वार, मूंग आदि।
- डिजिटल ऐप्स और मौसम पूर्वानुमान: सही समय पर कृषि कार्य के लिए फैसले लेना आसान।
क्लाइमेट-स्मार्ट खेती के लाभ
- फसल की उत्पादकता में वृद्धि
- जल और उर्वरकों की बचत
- कृषक आय में वृद्धि
- प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा
- पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना
निष्कर्ष
भारत में कृषि का भविष्य क्लाइमेट-स्मार्ट फार्मिंग में ही है। बदलते मौसम के अनुसार खेती को ढालना और नवीन तकनीकों को अपनाना ही आज के किसान की सबसे बड़ी जरूरत है।
भारतीय किसानों के लिए सुझाव
आप एक प्रगतिशील किसान बनना चाहते हैं? तो शुरुआत करें हल्की सिंचाई प्रणाली से, मृदा परीक्षण कराएँ और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से मार्गदर्शन प्राप्त करें।
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स्मार्ट खेती, स्मार्ट किसान – यही है भविष्य की कुंजी!