छोटे स्थानों में वर्टिकल फार्मिंग: अधिक पैदावार का तरीका
वर्टिकल फार्मिंग क्या है?
वर्टिकल फार्मिंग एक आधुनिक खेती तकनीक है जिसमें फसलें जमीन पर फैलाने के बजाय ऊंचाई में उगाई जाती हैं। यह तरीका खासकर उन किसानों और शहरी निवासियों के लिए उपयोगी है जिनके पास खेती की जमीन कम है।
छोटे स्थान में वर्टिकल फार्मिंग क्यों करें?
- कम जगह में अधिक पैदावार संभव
- पानी और उर्वरक की कम आवश्यकता
- कीटनाशक और रसायनों का कम प्रयोग
- शहरों में भी खेती करना संभव
- पर्यावरण के लिए अनुकूल
वर्टिकल फार्मिंग के लिए आवश्यक चीजें
- ट्रे या कंटेनर (जूते के डिब्बे, प्लास्टिक ट्रे, बोतलें आदि)
- गमला मिट्टी या कोकोपीट
- धीरे घुलने वाली खाद/कम्पोस्ट
- धूप या ग्रो लाइट की उपलब्धता
- पानी की नियमित व्यवस्था
किन फसलों के लिए वर्टिकल फार्मिंग उपयुक्त है?
आप नीचे दी गई फसलों को आसानी से छोटे स्थानों में वर्टिकल फार्मिंग के जरिए उगा सकते हैं:
- पालक, मैथी, धनिया
- लेट्यूस, तुलसी, पुदीना
- टमाटर (झाड़ी वाले), मिर्च
- स्ट्रॉबेरी और कुछ प्रकार की बेल वाली सब्जियाँ
वर्टिकल फार्मिंग कैसे शुरू करें: आसान कदम
- पुरानी बोतलों या लकड़ी के शेल्फ से वर्टिकल स्ट्रक्चर बनाएं
- सही मिट्टी और खाद डालें
- बीज या पौधे लगाएं
- धूप या लाइट की व्यवस्था रखें
- नियमित पानी और देखरेख करें
लागत और लाभ
वर्टिकल फार्मिंग की शुरुआत कम लागत में की जा सकती है। पुराने डिब्बों, लकड़ी और बोतलों का पुन: उपयोग कर 1000–3000 रुपये में एक बेसिक सेटअप बनाया जा सकता है। इसके बदले में आप महीने में 5–10 किलो तक हरी सब्जियाँ प्राप्त कर सकते हैं।
निष्कर्ष
छोटे स्थान में यदि आप खेती करना चाहते हैं तो वर्टिकल फार्मिंग आपके लिए एक स्मार्ट, पर्यावरण-अनुकूल और लाभदायक विकल्प है।
भारतीय किसानों के लिए सुझाव
यदि आप छोटे किसान हैं या शहरी क्षेत्र में रहते हैं, तो अपनी बालकनी, छत या आंगन का बेहतर उपयोग कर वर्टिकल फार्मिंग शुरू करें। इससे आप अपनी सब्ज़ियों की आवश्यकताओं को पूरा ही नहीं करेंगे, बल्कि अतिरिक्त सब्जियाँ बेचकर आमदनी भी कमा सकते हैं।
तो अब देर किस बात की? आप भी वर्टिकल फार्मिंग शुरू कीजिए और कम जगह में अधिक उत्पादन से लाभ उठाइए!