भारत में जैविक खेती में महिलाओं की अहम भूमिका

जैविक खेती में भारत की महिलाएं अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उनके योगदान से न केवल खेती टिकाऊ बनी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिला है।

भारत में जैविक खेती में महिलाओं की अहम भूमिका

परिचय

भारत में जैविक खेती केवल एक तकनीक नहीं बल्कि एक आंदोलन बन चुका है – और इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में सबसे सशक्त भूमिका महिलाओं की रही है। महिलाओं ने पारंपरिक ज्ञान, मेहनत और पर्यावरण के प्रति अपनी संवेदनशीलता के दम पर इस क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है।

महिलाएं क्यों होती हैं जैविक खेती में सफल?

  • संवेदनशीलता के साथ खेती करना और प्रकृति के नियमों का पालन करना
  • प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन
  • पारंपरिक बीजों और जैव उर्वरकों का ज्ञान
  • घरेलू और खेत के कार्यों में सामंजस्य बनाना

भारत के विभिन्न राज्यों में महिलाओं की भागीदारी

उत्तर पूर्व भारत

मणिपुर, नागालैंड और असम की महिलाएं सामूहिक जैविक खेती द्वारा पूरे गांवों को आत्मनिर्भर बना रही हैं।

उत्तराखंड

‘चिपको आंदोलन’ की तरह ही यहां की महिलाएं पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं।

महाराष्ट्र और कर्नाटक

महिला स्वयं सहायता समूह न केवल जैविक उत्पादन में जुड़े हैं, बल्कि उत्पादों को बाजार में बेच कर आय बढ़ा रही हैं।

महिला किसानों की चुनौतियां

  • भूमि पर मालिकाना अधिकार की कमी
  • तकनीकी प्रशिक्षण और संसाधनों की पहुंच में कमी
  • बाजार तक सीधा संपर्क न होना

सरकार और NGO द्वारा मिल रही सहायता

भारत सरकार का ‘राष्ट्रीय जैविक कृषि मिशन’ और कई NGOs महिला किसानों को प्रशिक्षण, बीज, कंपोस्ट यूनिट और मार्केटिंग सहायता प्रदान कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, ‘देहात स्टार्टअप्स’ और ‘प्रगति फाउंडेशन’ जैसे संगठन महिला स्वावलंबन पर कार्य कर रहे हैं।

प्रेरणादायक कहानी: सरिता देवी, बिहार

बिहार के नालंदा जिले की सरिता देवी ने पांच महिलाओं के साथ मिलकर अपनी 2 एकड़ जमीन पर जैविक खेती शुरू की। आज वह न केवल 20 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं बल्कि अपने उत्पादों को ऑनलाइन और स्थानीय मंडी में बेच रही हैं।

निष्कर्ष

जैविक खेती में महिलाएं केवल किसान नहीं, बल्कि पर्यावरण की रक्षक, परिवार की पोषक और आर्थिक रूप से सशक्त समाज की निर्माता हैं। उनका योगदान सम्मान और प्रोत्साहन का पात्र है।

आह्वान (Call-to-Action)

अगर आप भी महिला किसान हैं या किसी महिला को जानते हैं जो जैविक खेती करना चाहती हैं, तो आज ही नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क करें या स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ें। जैविक खेती की शुरुआत करें, प्रकृति बचाएं और आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ाएं।

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