महिला-नेतृत्व वाले एफपीओ: सच्ची सफलताएं
किसान उत्पादक संगठन (FPO) क्या है?
एफपीओ यानी Farmer Producer Organization एक ऐसा संगठन होता है, जिसमें किसान आपसी सहयोग से एक इकाई बनाते हैं ताकि वे उत्पादन, प्रोसेसिंग और बिक्री के कार्य को बेहतर तरीके से कर सकें।
महिलाएं और एफपीओ: ग्रामीण भारत में नया बदलाव
आज देश के विभिन्न हिस्सों में महिलाएं न केवल खेती में सक्रिय हैं, बल्कि वे एफपीओ की संचालनकर्ता बनकर हजारों किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। ये महिला-नेतृत्व वाले FPOs महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।
1. ओडिशा की ‘माँ दुर्गा महिला एफपीओ’
- स्थान: मयूरभंज, ओडिशा
- सदस्य: 300 महिला किसान
- उपलब्धि: मक्का और सब्जियों के उत्पादन से सालाना ₹50 लाख का कारोबार
- विशेषता: महिलाओं को कृषि तकनीक और जैविक खेती का प्रशिक्षण
2. महाराष्ट्र की ‘स्वराज्य महिला एग्रो एफपीओ’
- स्थान: सतारा, महाराष्ट्र
- सदस्य: 200+ ग्रामीण महिलाएं
- उपलब्धि: फल-प्रसंस्करण यूनिट से स्थानीय ब्रांड की शुरुआत
- विशेषता: आम और जामुन से बने स्क्वैश और जैम शहरों में निर्यात
3. बिहार की ‘गंगा महिला किसान उत्पादक कंपनी’
- स्थान: पटना, बिहार
- सदस्य: 500 महिला किसान
- उपलब्धि: धान की उन्नत किस्मों का उत्पादन और थोक बिक्री
- विशेषता: सरकारी योजनाओं की सहायता से कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना
इन सफलताओं से क्या सिखा जा सकता है?
- महिला किसानों में नेतृत्व की जबरदस्त क्षमता है
- सरकार और NGO की मदद से ग्रामीण महिलाएं भी कारोबारी बन सकती हैं
- एफपीओ के माध्यम से उचित दाम और बेहतर बाज़ार तक पहुंच संभव
सरकार की पहल जो महिला एफपीओ को समर्थन देती हैं
सरकार महिला-एफपीओ को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चला रही है जैसे:
- 10,000 FPO योजना: जिसके तहत हर एफपीओ को ₹15 लाख तक का वित्तीय समर्थन
- महिला कृषक सशक्तिकरण परियोजना (MKSP): महिला किसानों को संगठन, प्रशिक्षण और तकनीकी समर्थन
कॉल टू एक्शन: ग्रामीण महिलाएं अब पीछे न रहें!
अगर आप एक महिला किसान हैं या किसानों के समूह से जुड़ी हैं, तो एफपीओ शुरू करने पर विचार करें। इससे आप बाजार में उचित कीमत पा सकती हैं और अपने गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना सकती हैं।
आज ही अपने नजदीकी कृषि अधिकारी से संपर्क करें और महिला-नेतृत्व वाले एफपीओ की पहल में जुड़ें।